वो में हूं
गुजार दिये तूने कहि दिन और साल
पर काट ना सकोगी वो पल में हूं,
पर काट ना सकोगी वो पल में हूं,
करोगी गुफ़्तगू हर किसीके साथ
पर जब लब ठहर जाएंगे वो नाम में हूं,
पर जब लब ठहर जाएंगे वो नाम में हूं,
होगी तुम्हारे आसपास हज़ारोकि भीड़
पर अकेलेपनमें तुम चाहोगी वो साथ में हूं,
पर अकेलेपनमें तुम चाहोगी वो साथ में हूं,
फाड़ दिए तूने हर वो कागज़
पर कभी मिटा नही पाओगी वो अल्फ़ाज़ में हूं,
पर कभी मिटा नही पाओगी वो अल्फ़ाज़ में हूं,
गुमती रहती हो तुम आज कल
पर जहासे वापिस आओगी वो रास्ता में हूं,
पर जहासे वापिस आओगी वो रास्ता में हूं,
मिटा दिए तूने हर वो निशान
पर किसीको न दिखने वाला वो दाग में हूं,
पर किसीको न दिखने वाला वो दाग में हूं,
तोड़ दिए तूने हर वो ख्वाब
पर जो तुमने पाला है वो सोख में हूं,
पर जो तुमने पाला है वो सोख में हूं,
सब कुछ है तुम्हारे पास
पर चुभती रहेगी वो कमी में हूं,
पर चुभती रहेगी वो कमी में हूं,
बाते बहोत अछि कर लिया करती हो
पर महशूश करोगी वो जज़्बात में हूं,
पर महशूश करोगी वो जज़्बात में हूं,
बताती रहोगी सबको खुद के बारे में
पर चाह कर भी नही बता पाओगी वो नाम मे हूं,
पर चाह कर भी नही बता पाओगी वो नाम मे हूं,
होगी सारे जहांन की जमीन तुम्हारे पास
पर कभी हांसिल नही कर पाओगी वो "आकाश" में हूं.
पर कभी हांसिल नही कर पाओगी वो "आकाश" में हूं.
✍️अक्ष.
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